संपादकीय

अवस्थी के जाने से हैरानी नहीं….कामकाज में नुक्ताचीनी के बाद भी वो करीब-करीब तीन साल डीजीपी रहे…

संपादकीय,14 नवंबर। डीजीपी बदले गए तो जानकार लोगों को आश्चर्य नहीं हुआ। सुनते हैं कि डीएम अवस्थी के तौर-तरीकों से गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू तो नाखुश थे ही। सीएम ने भी कलेक्टर-एसपी कॉन्फ्रेंस से पहले अहम बैठकों में उन्हें बुलाना बंद कर दिया था। शिकायतें तो कई थीं, लेकिन एक शिकायत यह भी थी कि वो पीएचक्यू के बजाए पुलिस लाइन के सामने ट्रैंजि़ट हॉस्टल में ज्यादा समय गुजारते हैं। एक तरह से पुलिसिंग चौपट-सी हो गई थी।

चर्चा है कि अवस्थी के रेगुलर डीजी के ऑर्डर होने से पहले उन्हें उनकी खामियों को लेकर साफ-साफ बता दिया गया था। यह भी कहा गया था कि इन सबको नजरअंदाज कर रेगुलर डीजीपी बनाया जा रहा है। हल्ला तो यह भी है कि अवस्थी ने सब-कुछ ठीक करने का भरोसा दिलाया था। लेकिन कुछ नहीं हुआ। अहम मसलों पर वो जांच को किसी किनारे पर नहीं पहुंचा रहे थे। कामकाज में नुक्ताचीनी के बाद भी वो करीब-करीब तीन साल डीजीपी रहे। यानी एएन उपाध्याय के बाद सबसे ज्यादा समय तक।

तमाम खामियों के बावजूद पुलिस वेलफेयर आदि को लेकर विभाग के छोटे अधिकारी-कर्मचारी उनसे खुश रहते थे। वैसे डीजीपी पद से हटने का ऑर्डर होने के बाद बिना देरी किए अवस्थी ने नया दायित्व संभाल भी लिया है। यदि सब कुछ ठीक रहता है, तो उन्हें और दायित्व  मिल सकता है। क्योंकि रिटायरमेंट में अभी डेढ़ साल से अधिक समय बाकी है।

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